नर बिना नारी नहीं और नारी के बिना नर नहीं बात समझ में आ जाए तो हमको किसी का डर नहीं। लड़का लड़की में फर्क जो समझे वह समझो शैतान है। हक सन देता दोनों को वह समझो इंसान है।
दृष्टि दाल देख जगत में पाप ह पाप छाया है वह भला क्या देंगे जिन्होंने दिन ईमान गवाया है । कम बुद्धि के लोगों का मत वंश चलाएगा बेटा पूत कपूत भी हो सकता है |
वंश उतारेगा बेटा नाम अमर कर गई पति का रत्न से निपट रानी थी अनेक अनेक औरतों के संग जोहर किया महारानी थी पद्मनी नाम से जानी जाती है ।
उन्हें बेटा प्यारा लगता है जन्म से पहले ही बेटी का वह दुश्मन बन जाता है। पति-पत्नी दोनों मिलकर है भ्रूण हत्या की जिम्मेदार पाप दोष से वे नहीं डरते करते जाएं अत्याचार ।
नरवर मांगेगा प्रभु से कि बेटा हो जाए मेरे बेटों की तादाद बढ़ेगी यही दुर्भाग्य हुआ तेरे। अगर भगवान तेरे बेटा की शादी करना चाहे बहू कहां से आएगी बेटी तो घटती जावेगी पृथ्वी सुन्न ह जाएगी बेटी से ही बेटा मिलता है
कब बात समझ में आएगी आत्मा को पछतावा होगा करनी का फल पाएगा। कभी बेटी बन कभी बहू बन निडर बन कर आई है कभी इंदिरा गांधी बनकर भारत की शान बढ़ाई है ।
ठोस कदम सरकार उठाए भवन हत्यारों को आना है बहुत या के पाप के भागी 3 को सजा दिलाना है पति-पत्नी व दोषी डॉक्टर को माफ करो मत ना ब्रह्म हत्या के पाप के भागी सजा दिलाओ डरो मत ना।
हे ईश्वर इन्हें क्षमा ना करना जो कन्या की हत्या करते हैं जन्म से पहले या फिर बाद में राक्षस कंस बन जाते हैं। बेटी बनकर माता पिता के घर को स्वर्ग बना देती है। और बहू बनकर ससुराल में मंदिर बना देती है।
वैज्ञानिक बनती, डॉक्टर बनती, अंतरिक्ष में ये जाति साहस के बल पर सदाशिव राजस्थान है पाती। झांसी की रानी बनकर नारी दुश्मन से लोहा लेती मीरा दासी कृष्ण प्रेम में सुख बुध अपने खो देती।
जिस जननी से जन्म लिया ना तो क्या उसका पुत्र नहीं पुत्र है पर बुद्धि भ्रष्ट इसका कोई उत्तर नहीं हो नारी सम्मान जगत में शोक की लहर छा जाएगी ।
गंगा जमुना सरस्वती मिल गई ना आ जाएगी देश होगा खुशहाल जगत में जब होगा नारी सम्मान धर्मराज स्थापित होगा होगा भारत देश महान नारी के दुख संकट को तुम समझ ना पाओगे इंसान यदि नारी के दुख समझ गए होगा तो मैं पूरा ज्ञान।
नारी की व्यथा को कैसे कहें किससे कहें और कौन सुने हैं मन ही मन में उठती रहती थी आंसू मोन रहे। कलयुग के प्रभाव को देखो कितना असर दिखाया है धर्म न जाने करना जाने लोभी मन भरमाया है।
लोभी लालची जो होते हैं दहेज की आशा करते हैं पढ़ाई धन की आस लगाए नारी को दुख देते हैं। सास ससुर वह अपना पति भी दुश्मन सा व्यवहार करें सह ना सके जब उन कष्टों को क्या करें और क्या ना करें।
दहेज के लोभी लालची ओने नारी का अपमान किया ना मिलने पर अपनी बहू को घर से बाहर निकाल दिया कई औरतें जलकर मर गई कई ट्रेन से कटकर लोभी मन से तो धन का लोभी कोई मरे चाहे कटकर।
श्री राम प्रभु ने सीता के संग 14 वर्ष बिताए थे श्री कृष्ण राधा के संग सुंदर रास रचाए थे। हर मुश्किल का करे सामना संग नारी के चलना है ।
संघ औरत का लेकर के अब हमको आगे बढ़ना है। करनी का फल पड़े भोगना देरी है अंधेर नहीं रामस्वरूप दास प्रभु का करता हेरा फिर नहीं ।
